27 नवंबर 2014 - 18:07
 ईरान, विस्तारवाद के समक्ष घुटने नहीं टेकेगा

वरिष्ठ नेता ने मानवीय व ईश्वरीय ज़िम्मेदारी के भावना और आत्मज्ञान को स्वयंसेवी बल बसीज के तार्किक विचारों का आधार बताया है।

वरिष्ठ नेता ने मानवीय व ईश्वरीय ज़िम्मेदारी के भावना और आत्मज्ञान को स्वयंसेवी बल बसीज के तार्किक विचारों का आधार बताया है।
स्वयंसेवी बल बसीज के उच्च अधिकारियों और बसीज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से भेंट की। इस भेंट में वरिष्ठ नेता ने कहा कि रक्षा, राजनीति, अर्थव्यवस्था, कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और धार्मिक संस्थाएं बसीज की सक्रियता के कार्यक्षेत्र हैं। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि इराक़, सीरिया, लेबनान और ग़ज़्ज़ा में स्वयंसेवी विचारधारा दिखाई दे रही है, कहा कि इसका असर निकट भविष्य में मस्जिदुल अक़्सा और बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र के लगभग सभी लोग स्वयंसेवी हैं और यही इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था के नाकाम न होने का कारण है। उन्होंने बल दिया कि इस्लामी व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य साम्राज्य से मुक़ाबला है और इस उद्देश्य को हासिल करने में किसी प्रकार की सुस्ती नहीं आनी चाहिए।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस बात पर बल देते हुए कि इस्लामी गणतंत्र ईरान को अमरीकी राष्ट्र से कोई समस्या नहीं है, कहा कि ईरान की समस्या अमरीकी सरकार की धौंस धमकी व विशिष्टता लेने की इच्छा है। वरिष्ठ नेता ने परमाणु वार्ताकार टीम के सदस्यों के तार्किक व गंभीर प्रयासों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरानी वार्ताकार टीम गुट पांच धन एक के साथ बातचीत में धौंस भरे व्यवहार का मुक़ाबला कर रही है और सामने वाले पक्ष ख़ास तौर पर अमरीका की तरह हर दिन अपनी बात से नहीं पलट रही है। वरिष्ठ नेता ने परमाणु वार्ता के परिप्रेक्ष्य में कुछ अमरीकी अधिकारियों की ओर से इस्राईल की रक्षा की ज़रूरत से संबंधित बयान के बारे में कहा कि परमाणु समझौता हो या न हो, इस्राईल में दिन प्रतिदिन दिन अशांति बढ़ती जाएगी, हालांकि अमरीकी अधिकारी इस्राईल की सुरक्षा के लिए कोशिश नहीं कर रहे हैं बल्कि वे अपने हितों के इच्छुक हैं।
उन्होंने कहा कि अमरीकी अधाकरियों का मुख्य लक्ष्य ज़ायोनी पूंजिपतियों के नेटवर्क को ख़ुश रखना है क्योंकि यह नेटवर्क उन्हें रिश्वत, पैसे और पद देता है और अगर वे इस नेटवर्क की इच्छाओं के ख़िलाफ़ काम करेंगे तो उन्हें धमकी व बदनामी का सामना करना यहां तक कि जान से हाथ भी धोना पड़ सकता है।